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श्री कृष्ण के जन्म का रहस्य

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श्री कृष्ण जी

श्री कृष्ण के जन्म का रहस्य

दोस्तों आज की मेरी पोस्ट पुराणिक कथा पर आधारित है। मैं इस पोस्ट में श्री कृष्ण जी के जन्म का रहस्य के बारे में बताने जा रहा हूं। मैं आशा करता हूं कि आपको यह पोस्ट बहुत अच्छी लगेगी। इस पोस्ट में कृष्ण जी के जन्म, कलयुग का आगमन और कृष्ण जी चमत्कार के बारे में प्वाइंट टू प्वाइंट बताया गया है।

श्री कृष्ण जी के जन्म का रहस्य

  • भगवान श्री कृष्ण का जन्म आज से 7277 वर्ष पहले मधुरापुरी परिवर्तित नाम “मथुरा (उत्तर प्रदेश) में उनके मामा कंस की जेल में हुआ था।
  • जिस जेल में श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ था, उस जेल के गर्भगृह में वह ‘पत्थर का चबूतरा’ आज भी विद्यमान है। जिसपर श्रीकृष्ण की माँ देवकी और पिता वासुदेव जी को हथकड़ी लगाकर जन्म से पहले कैद में बन्द कर रखा गया था।
  • उस समय चौबीसों घण्टे कपाट बन्द रहते थे। पहरेदार बाहर जाग कर पहरा देते थे।
  • कंस को बहुत पहले ही आकाशवाणी हुई थी कि “ऐ कंस जिस लाडली बहन को तू इतना प्यार करता है, उसके गर्भ से उत्पन्न आठवीं सन्तान तेरी मौत का कारण बनेगी।
  • बच्चे श्रीकृष्ण के जन्म के समय माता देवकी असहनीय पीड़ा से चिल्ला रही थी। लेकिन उसकी मदद के लिए कोई न आया।
  • परन्तु भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का करिस्मा होना था और भगवान कृष्ण जी का जन्म हुआ। पहरेदार सोते के सोते रह गये, माता देवकी और पिता वासुदेव की हथकड़ी खुल गयी।
  • श्री वासुदेव जी लाला श्रीकृष्ण को लेकर (टोकरी में छिपाकर) गोकुल 12 किलोमीटर दूर रात के साये में पैदल यमुना जी में कम पानी वाली जगह से गोकुल जाने के लिये पार कर रहे थे कि अचानक पानी बढ़ गया ओर बढ़ता ही चला गया।
  • श्री वासुदेव जी की नाक तक पानी पहुंचने वाला था कि वह चिल्लाने लगे और बोलने लगे कौईले-कौईले, कौईले मेरे लाल को, कौईले बचा ले मेरे लाल को, कौईले-कौईले, कौईले-कौईले, बचाले मेरे लाल को। 
  • पिता वासुदेव की करहाती तड़फती आवाज़ सुनकर लाला श्रीकृष्ण ने अपना दाहिना पैर टोकरी से बाहर निकाला। 
  • यमुना जी को श्रीकृष्ण के चरण का स्पर्श करने थे, सो चरण स्पर्श कर यमुना जी शान्त हो होने लगी। यमुनाजी ने वासुदेव को रास्ता दे दिया।
  • अतः इस जगह का नाम “कौईले गांव” तथा “कौईले-घाट” पड़ गया।
  • बाढ़ का पानी कम होने के बाद, नदी पार कर श्री वासुदेव गोकुल पहुँचे और गोकुल में पहले से जन्मी बच्ची “योगमाया” को लेकर कंस की जेल मधुरापुरी (मथुरा) लौट आए। प्रभु की लीला थी कि सभी पहरेदार/मन्त्री सोते रह गए।
  • सुबह को जब आठवें बच्चे के जन्म का महाराजा कंस को पता चला, तो बच्ची को भरे दरबार में मंगवाकर ‘पत्थर पर पटककर मारना’ चाहा। 
  • तभी आकाश में बिजली कड़की और बच्ची योगमाया हाथ से छूट गयी।
  • योगमाया आकाश में जाते-2 बोली – अरे दुष्ट कंस तुझे मारने वाला तो गोकुल में पैदा हो गया।
  • आज भी मथुरा में जन्मस्थान के पास में ही पोतड़ा (नवजात शिशु के कपड़े) धोने की जगह “पोतरा कुन्ड” काफी गहरा है।
  • भगवान कृष्ण जी का जन्म स्थान मधुरापुरी वर्तमान मथुरा दशरथ पुत्र श्रीराम जी के भाई भरत की राजधानी भी थी। 
  • भगवान श्रीकृष्ण जी का जन्म अष्टमी के दिन 5257 वर्ष पहले मधुरापुरी वर्तमान मथुरा में हुआ था। प्रभु यीशु के कैलेंडर के अनुसार श्री कृष्ण जी का जन्म प्रथम शताब्दी से पूर्व 5257 वर्ष पहले हुआ। यदि इसमें प्रभु यीशु के बाद के समय को जोड़ दिया जाए तो 5257+2020 = 7277 वर्ष पहले भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ।
  • इससे ज्ञात होता है कोरवौ-पान्डवों (हस्तिनापुर) का पारिवारिक युद्ध महाभारत भी भगवान श्रीकृष्ण के समय 7250 वर्ष पहले हुआ था।

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कृष्ण जी जाने के बाद कलयुग का आगमन

  • कलयुग का आगमन तब हुआ जब भगवान श्री कृष्ण महाभारत समाप्ति के बाद बैंकुट लौट गए।
  • तब राजा परीक्षित प्रजा का पालन कर रहे थे। कृष्ण जी के जाने के बाद पृथ्वी दुःखी थी। एक दिन धर्म और पृथ्वी बैल और गाय का रूप धारण कर अपने दुखों पर चर्चा करने लगे। धर्म ने पृथ्वी से दुःख का कारण पूछा पृथ्वी ने कहा- हे धर्म! मेरे दुःख का कारण भगवान श्री कृष्ण का पृथ्वी छोड़कर चला जाना है। अब पृथ्वी पर धर्म की स्थापना कौन करेगा।
  • उसी समय कलयुगी असुर आया और दोनों को बुरी तरह पीटने लगा। वहां से गुजर रहे राजा परीक्षित ने कलयुग को गाय और बैल को पीटते देखा। यह राजा परीक्षित पर देखा ना गया उन्होंने कलयुग को मारने के लिए अपने धनुष से तीर निकाला, कलयुग चिल्लाने लगा और उसने राजा परीक्षित से क्षमा मांगी। 
  • राजा परीक्षित ने कलयुग को अपने राज्य से जाने को कहा लेकिन सब जगह राजा का राज्य होने के कारण उसने रहने के लिए राजा के राज्य में ही स्थान मांगा। राजा परीक्षित ने कलयुग को रहने के लिए धुत, मद्यपान, परस्त्रीगमन और हिंसा में स्थान दिया। अंत में पांचवां स्थान स्वर्ण में दिया।
  • छल कपट कर कलयुग राजा परीक्षित के मुकुट में ही रहने लगा। 
  • कलयुग का प्रभाव शुरू होने लगा जब राजा परीक्षित वन में शिकार करते करते थक गए थे तो उन्हें प्यास लगी। उन्होंने वन में तपस्य कर रहे महर्षि शमिक से जल की मांग की। वह बार बार जल की मांग करने लगे। महर्षि शमिक तपस्य में लीन थे उन्होंने उनकी समाधि को भंग करने के लिए गले में मरा हुआ सांप डाल दिया। क्योंकि कलयुग उनके मुकुट में विराजमान था इससे राजा की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी थी।
  • जब इस बात का पता महर्षि के पुत्र श्रृंगी को चला तो वह बहुत क्रोधित हुआ और उन्होंने राजा परीक्षित को श्राप दिया कि राजा की मृत्यु सातवें दिन तक्षक नाग के काटने से हो जाएगी। यह सुनकर राजा परिक्षित अपना राजपाट पुत्र जनमेजय को देकर 7 दिनों तक शुकदेव जी से भागवत गीता सुनने लगे।
  • सातवें दिन तक्षक नाग ने महल में आने के लिए रास्ता ढूंढा वह एक कीड़े के रूप में महल में घुसा और राजा परीक्षित को डस लिया। इससे राजा परीक्षित की मृत्यु हो गई।
  • अतः राजा परीक्षित की मृत्यु के बाद कलयुग पूरी पृथ्वी पर व्याप्त हो गया।

श्री कृष्ण जी के जन्म का रहस्य

भगवान श्री कृष्ण जी के चमत्कार

  • मधुरापुरी वर्तमान मथुरा में भगवान् श्रीकृष्ण  कालीन कुल 12 वन क्षेत्र थे।
  • इन 12 वनों में से एक वन है “निधिवन”।
  • निधिवन में सभी पेड़ पौधे तुलसी के हैं। यह हर समय हरा भरा रहता है। इन पेड़ों की जड़े खोखली है। इन्हें पानी नहीं दिया जाता इसके बाद भी तुलसी के पेड़ इतने बड़े है कि इतने बड़े तुलसी के पेड़ कहीं भी नहीं पाए जाते हैं।
  • मान्यता है कि तुलसी के पेड़ पौधे ही कृष्ण और गोपियां हैं।
  • ‘निधिवन’ मधुरापुरी (मथुरा) में आज भी श्रीकृष्ण जी रास रचाने आते हैं। भगवान कृष्ण अपनी सोलह हजार एक सौ आठ गोपियों के साथ रास रचते हैं। द्वापर युग में कृष्ण जी की गोपियों की संख्या 16108 थी जिनके साथ वह महारास रचते थे।
  • रात के नौ बजे के बाद पशु पक्षी और मनुष्य निधिवन को खाली कर देते हैं।
  • यदि कोई निधिवन में रात के नौ बजे के बाद गलती से चला भी जाता है तो वह पागल हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है।
  • निधिवन संत हरिदास की तपस्थली है। हरिदास जी का जन्म 1490 ईसवी में हुआ था।
  • कृष्ण जी ने जिस रूप में हरिदास जी को दर्शन दिए थे वह चरण चिन्ह आज भी विद्यमान है।
  • 12 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद हरिदास जी को श्रीकृष्ण जी ने प्रकट होकर साक्षात् दर्शन दिये और जमीन में लुप्त गये। हरिदास जी जोर-2 से चिल्लाने लगें।
  • ढूँढो मेरे कृष्णा को, ढूँढो मेरे कृष्ण को, अरे बड़ा तिरछा-बाँका हैं। अभी बच्चें के रूप में दर्शन दिये और अभी ना जानें कहाँ छुप गया मेरा लाला ?
  • उस समय आस-पास के सभी लोग निधिवन में आ गए और बाल रूपी कृष्ण जी को ढूंढने लगे।
  • आखिर खुदाई करने वाले को एक बच्चा भगवान के रूप में काले पत्थर की तस्वीर के रूप में मिला। लोगों ने बच्चा भगवान के ‘बाँके बिहारी लाल’ के रूप में दर्शन करने शुरू कर दिये।
  • एक बार की बात है सम्राट अकबर हरिदास जी का संगीत सुनने वेश बदलकर निधिवन आए। अकबर को हरिदास जी का संगीत प्रिय लगा। उन्होंने संत हरिदास जी से कहा आप इतना अच्छा संगीत गाते हैं इस वीरान जंगल में गाने से अच्छा है आप मेरे दरबार में गाए। इस पर हरिदास जी ने कहा कि यह संगीत मेरे आराध्य कृष्ण जी को समर्पित है।
  • इतना कहने पर अकबर क्रोधित हुआ और उसने निधिवन के एक हिस्से को तोड़ दिया। हरिदास जी से कहा कि यदि तुम्हारे भगवान में इतनी शक्ति है तो कोई चमत्कार करके दिखाए।
  • उसी रात को अकबर के सपने में कृष्ण जी आए और अकबर से कहा कि जो तूने निधिवन को हानि पहुंचाई है, उसे ठीक करवा दे वरना तुझे जिस राजपाट पर इतना घमंड है। वह जल्द ही नष्ट हो जाएगा। अकबर ने कृष्ण जी से क्षमा मांगी और निधिवन के मरम्मत का कार्य कराया।
  • माना जाता है कि सुबह की पूजा-अर्चना से पूर्व श्रीकृष्ण जी श्री जगन्नाथ पुरी धाम उड़ीसा पहुँच जाते हैं और शाम की आरती में निधिवन श्रीमधुरापुरी (मथुरा) चले आते हैं।
  • इस निधिवन में ही श्रीकृष्ण जी का शयनकक्ष रंगमहल है। इस शयनकक्ष में एक पलंग बिछाया गया है, इस पलंग पर रोज शाम को गुलाब के फूलों की सेज बिछाई जाती है, मेज पर श्रृंगार का पूरा सामान चूड़ी, बिंदिया, सिन्दूर, बूंदी के लड्डू, पानी का भरा काँच का गिलास भरकर रखा जाता है। शयनकक्ष में आरती करके लकड़ी से बना दरवाजा बंद कर दिया जाता है। फिर उसी चोखट पर लगा धातु का दरवाजा भी बाहर से बन्द कर दिया जाता है। बाद में सभी भक्त निधिवन से बाहर आ जाते हैं।
  • जब सुबह की आरती के समय दरवाजा खोलकर देखते हैं, तो फूलों की सेज के फूल बिखरें मिलते हैं, काँच के गिलास का पानी कम मिलता है, बूंदी के लड्डू आधे मिलते हैं, सिन्दूर की डिबिया को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे अंगूठे से सिन्दूर छूकर उठाया गया हो। कहते हैं श्रीकृष्ण जी रात में यहां आते हैं।
  • बहुत समय पहले एक राजा कृष्ण जी के दर्शन करने आये, उनकी रानी श्री कृष्ण जी को घूर-2 कर देख रही थी। इससे बच्चे के रूप में भगवान रानी को भा गये और भगवान भी महारानी के साथ रथ में पीछे लटक कर महारानी के महल तक चले गये।
  • इसी कारण श्रीकृष्ण बच्चा होने के कारण उन्हें दर्शन कराने के साथ-2 बार-2 पर्दे से ढक दिया जाता है ताकि फिर किसी पर मोहित होकर उनके साथ ना चले जाये।

हैलो दोस्तों, आपको मेरी यह पोस्ट श्री कृष्ण जी के जन्म का रहस्य कैसे लगी। यदि आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो अपनी प्रतिक्रिया दें और सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करे। आप अन्य जानकारी को जानने के लिए हमारी वेबसाइट ज्ञानीभारत.com को विजिट करते रहे।

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