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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय

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Pranab mukherjee By Vishnu_srinath, Source, is licensed under CC-By-SA-4.0

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय: भारतीय राजनीति के पितामह प्रणब मुखर्जी एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने अपना सारा जीवन देश की सेवा में लगा दिया। यह प्रतिभा के धनी थे। इनका शांत स्वभाव उनको अन्य सभी राजनेता से अलग करता था। देश के महान राजनेता प्रणब मुखर्जी जीवनभर कांग्रेस के विश्वासपात्र रहे थे। उन्होंने कांग्रेस में रहकर देश की सेवा की। इनके बचपन का नाम पोल्टू था। आज हम एक पोल्टू से राष्ट्रपति बनने वाले प्रणब मुखर्जी के जीवन पर चर्चा करेंगे-

प्रणब मुखर्जी का प्रारंभिक जीवन

प्रणबप्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसम्बर 1935 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मिराती नामक गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम कामदा किंकर मुखर्जी और माता का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी था। इनके पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे। जिन्होंने भारत की आजादी में अपना योगदान दिया। प्रणब दा जी के पिता देश की आजादी में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे। इनके पिता कामद किंकर मुखर्जी ने 12 साल ब्रिटिश जेल में बिताए। आजादी के बाद इनके पिता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। प्रणब मुखर्जी पर उनके पिता के व्यक्तित्व का प्रभाव था। प्रणब मुखर्जी भी बचपन से ही पिता की भांति देश की सेवा करना चाहते थे। प्रणब मुखर्जी ने विद्यासागर कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने कलकता विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। जहां उन्होंने इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद कानून की डिग्री हासिल कर वकालत करने लगे। उन्होंने 1963 में विधासागर कॉलेज के प्राध्यापक के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात यह पत्रकार के रूप में कार्य करने लगे। यह बंगाल साहित्य परिषद के ट्रस्टी और अखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष रह चुके हैं।प्रणब दा ने डी लिट में भी उच्च शिक्षा प्राप्त की है। 13 जुलाई 1957 को सुभ्रा मुखर्जी के साथ इनका विवाह हुआ। वर्तमान में इनके दो पुत्र और एक पुत्री है। 

राजनीति कैरियर

प्रणब मुखर्जी एक लंबे अरसे तक कांग्रेस पार्टी में रहे। इन्होंने अपने राजनीति कैरियर की शुरूआत तब की जब यह 1969 में कांग्रेस की ओर से राज्यसभा के सदस्य बने। इसके बाद 1975, 1981, 1991, 1999 में फिर चुने गए। उनकी सेवा को देखते हुए सन 1984 में इन्हे भारत का वित्त मंत्री बनाया गया। पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में 10 फरवरी 1995 में यह पहली बार विदेश मंत्री बनाए गए। 1991 से 1996 तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे। 1997 में यह संसद चुने गए। राजीव गांधी की मृत्यु के बाद प्रणब दा ने कांग्रेस पार्टी में अपनी निष्ठा को बनाया रखा। जिससे यह सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के करीब आ गए। जब सोनिया गांधी राजनीति में निपुण नहीं थी तो प्रणब दा इनके सलाहकार बने रहे। यह हर मोर्चे पर सोनिया गांधी को सलाह देते रहे। 2004 के आम चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आई और प्रणब दा को इस नई सरकार का रक्षा मंत्री बनाया गया। 

राष्ट्रपति पद

2012 को राष्ट्रपति चुनाव होने वाला था। कांग्रेस की ओर से एक मात्र चेहरा प्रणब मुखर्जी थे। जबकि दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी की ओर से पीए संगमा मैदान में थे। 25 जुलाई 2012 को पीए संगमा को 70 प्रतिशत वोटों से हराकर देश के 13 वें राष्ट्रपति बने। उन्होंने अपने पांच साल का शासनकाल एक कर्तव्यनिष्ठा के साथ पूरा किया। भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इनके व्यक्तिव के बड़े प्रशंसक थे। नरेंद्र मोदी और अन्य विपक्षी दल इनका बड़ा सम्मान करते थे।

सम्मान

1984 में यूरोजन पत्रिका ने प्रणब दा को दुनिया का सबसे सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री बताया। 1997 में उन्हें उत्कृष्ट संसद का अवार्ड मिला। 2008 में उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए देश का दूसरा बड़ा सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया गया। 26 जनवरी 2019 को राष्ट्रीय सेवा के लिए उन्हें देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया गया।

एक लेखक

प्रणब दा जी को लिखने का बड़ा शौक था। वह अपने विचारों को डायरी में लिपिबद्ध करते थे। उनकी शर्त थी कि उनके द्वारा लिखे गए डायरी में विचारों को उनकी मृत्यु के बाद ही प्रकाशित किया जाए। उन्होंने डायरी में अपने अनुभवों का वर्णन किया है। वह किताबें पढ़ने के भी बड़े शौकीन थे। उन्होंने ‘द कोलिएएशन ईयर्स: 1996-2012’ लिखी।

निधन

अपनी उत्कृष्ट सेवा से देश को नई दिशा देने वाले पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को 10 अगस्त 2020 को मस्तिष्क में खून थक्का जमने के कारण दिल्ली अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिसके चलते उनकी सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद भी सेहत में कोई भी सुधार न होने के कारण 31 अगस्त 2020 को दिल्ली अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।

प्रणब जी के राजनीतिक कैरियर पर एक नजर
  • 1969 को पहली बार कांग्रेस की ओर से राज्यसभा सदस्य चुने गए।
  • 1973 में इंदिरा गांधी सरकार में पहली बार मंत्री बने।
  • 1978 में प्रणब जी की सेवा को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य बनाया गया।
  • 1978 में ही यह इंडिया कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष भी बने। 
  • 1980 में प्रणब दा जी राज्यसभा में सदन के नेता बने।
  • 1982 में इंदिरा गांधी की सरकार में भारत के वित्त मंत्री बने। साथ ही वाणिज्य मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाला।
  • 1986 में राजीव गांधी से मतभेद के कारण नेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस पार्टी की स्थापना की।
  • 1988 में कांग्रेस में वापसी की और अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया।
  • 1991 से 1996 तक पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे।
  • 1995 में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में विदेश मंत्री बनाए गए।
  • 2004 में कांग्रेस सत्ता में आई। उन्होंने भी लोकसभा का चुनाव जीता और प्रणब दा जी को 2004 से 2006 तक देश का रक्षा मंत्री बनाया गया।
  • 2009 में फिर एक बार देश का वित्त मंत्री बनाया गया।
  • संप्रग की ओर से जून, 2012 में राष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित किया गया और जुलाई, 2012 में एनडीए की ओर से घोषित उम्मीदवार पीए संगमा को भारी वोटों से हराकर देश के 13 वें राष्ट्रपति बने।

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