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भारतीय इतिहास में लड़े गए प्रमुख युद्ध

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भारतीय सेना की शौर्यता का दृश्य

भारतीय इतिहास में लड़े गए प्रमुख युद्ध

एक सैनिक के लिए उसकी भूमि उसकी मां होती है। अगर उसकी धरती मां को कोई बुरी नजर से देखता है तो युद्ध होना संभव है। ऐसे ही अनेक युद्ध भारत की भूमि पर लड़े गए हैं। जहां अनेक वीर सपूतों ने अपने बलिदान से भारत मां की रक्षा की। भारत प्राचीन काल से ही विदेशी आक्रमण का केंद्र स्थल रहा है। जहां एक बाद एक अनेक युद्ध लड़े गए। कलिंग युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक सब ने कुछ ना कुछ खोया।

जब अशोक ने कलिंग के युद्ध में नरसंहार देखा तो वह धर्म की नीति पर चले पड़े और कभी ना युद्ध करने का संकल्प लिया। युद्ध कोई नहीं चाहता सब शांति के पक्षधर हैं। दुनिया में शांति ही खुशी ला सकती है। आज हम भारतीय इतिहास में लड़े गए प्रमुख युद्ध पर चर्चा करेंगे।

भारतीय इतिहास में लड़े गए प्रमुख युद्ध

हैलो दोस्तों, मैं पंकज भारत आपका ज्ञानीभारत.com पर स्वागत करता हूं। आज हम भारतीय इतिहास में लड़े गए प्रमुख युद्ध पर चर्चा करेंगे। इस पोस्ट में कलिंग युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक का वर्णन किया गया है। मैं आशा करता हूं कि इतिहास से संबधित यह पोस्ट आपको अच्छी लगेगी।

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भारतीय इतिहास में लड़े गए प्रमुख युद्ध

कलिंग का युद्ध

  • कलिंग का युद्ध 261 ईसा पूर्व में मौर्य वंश के महान सम्राट अशोक और कलिंग देश के मध्य लड़ा गया था।
  • इस युद्ध में में भयंकर रक्तपात हुआ। इस युद्ध में इतने लोग मरे कि उनके शवों को देखकर सम्राट अशोक दुखी हुए। उन्होंने इसके बाद भविष्य में कोई युद्ध ना लड़ने का निश्चय किया।
  • युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया और जीवन के अंतिम समय तक धम्म का प्रचार करते रहे।

तराइन का प्रथम

  • तराइन का प्रथम युद्ध 1191 ईसवी में मोहम्मद गौरी और राजपूत शासक पृथ्वी चौहान के बीच तराइन के मैदान में हुआ।
  • इस युद्ध में मुस्लिम आक्रांता मोहम्मद गौरी बुरी तरह पराजित हुआ।

तराइन का द्वितीय

  • तराइन का द्वितीय 1192 ईसवी में मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच लड़ा गया।
  • मोहम्मद गौरी पूरी तैयारी के साथ अपनी हार का बदला लेने के लिए भारत आया। गौरी के साथ प्रशिक्षित धनुर्धारी भी थे। जबकि पृथ्वी राज चौहान आधी अधूरी तैयारी के साथ युद्ध में शामिल हुए।
  • युद्ध में राजपूत शासक जयचंद ने पृथ्वीराज चौहान का साथ नहीं दिया और मोहमद गौरी के साथ जा मिला।
  • तराइन का द्वितीय युद्ध मुस्लिम आक्रांताओं के लिए सोने पे सुहागा लेकर आया। क्योंकि युद्ध के बाद भारत में मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना हुई।
  • मोहमद गौरी के दास कुतुबद्दीन ऐबक ने भारत में एक नए राजवंश गुलाम वंश की स्थापना की।

पानीपत का प्रथम युद्ध

  • पानीपत का प्रथम युद्ध 12 अप्रैल 1526 ईसवी को बाबर और लोदी वंश के सम्राट इब्राहिम लोदी के बीच लड़ा गया।
  • युद्ध में इब्राहिम लोदी बुरी तरह पराजित हुआ। जीत के लिए लालायित बाबर ने पहली बार इस युद्ध में तोप का प्रयोग इब्राहिम लोदी के विरुद्ध किया।
  • युद्ध के बाद भारत में एक नए राजवंश मुगल वंश की स्थापना हुई। मुगल वंश का संस्थापक बाबर था।
  • यही से राजा को बादशाह कहने की परंपरा की शुरुआत हुई।

पानीपत का द्वितीय युद्ध

  • पानीपत का द्वितीय युद्ध 5 नवम्बर 1556 को वीर हिन्दू सेनानायक हेमू या हेमचंद्र विक्रमादित्य और सम्राट अकबर की मुगल सेना के बीच लड़ा गया।
  • हेमू अफगान शासक आदिलशाह सूर का विश्वासपात्र सेनापति था। इसने अपने मालिक के लिए 24 लड़ाइया लड़ी जिनमें से 22 में वह विजय रहा।
  • पानीपत के द्वितीय युद्ध में हारने के बाद अफगान शासन का अंत हुआ।

पानीपत का तृतीय युद्ध

  • पानीपत का तृतीय युद्ध 14 जनवरी 1761 ईसवी को अफगान आक्रांता अहमदशाह अब्दाली और मराठा सेनापति सदाशिव राव भाऊ के बीच लड़ा गया।
  • इस युद्ध में मराठा पराजित हुए और उनका वर्चस्व समाप्त हो गया।
  • क्षत्रपति शिवाजी और अन्य पेशवाओं ने जिस बल के साथ मराठा साम्राज्य का परचम पूरे देश में फहराया था वह छण भर में चकनाचूर हो गया।
  • युद्ध इतना भयंकर था कि महाराष्ट्र के हर परिवार ने एक लाल का बलिदान दिया तो कुछ के घर के घर तबाह हो गए। 

तालीकोटा का युद्ध 

  • तालीकोटा या राक्षी तांगड़ी का युद्ध 24 जनवरी 1565 को हुसैन निजामशाही आदिलशाह की संयुक्त सेना बीजापुर, बीदर, गोलकुंडा और अहमदनगर तथा विजयनगर के वास्तविक शासक रामराय के मध्य हुआ।
  • इस युद्ध में हुसैन निजामशाह की संयुक्त सेना ने दक्षिण भारत के अंतिम हिन्दू साम्राज्य का अंत किया।

हल्दीघाटी का युद्ध

  • हल्दीघाटी का युद्ध इतिहास में अलग गाथा रखता है।
  • यह मध्यकालीन भारत का सबसे विख्यात युद्ध है। इस युद्ध में मेवाड़ के राणा महाराणा प्रताप ने अपनी शौर्यता का परिचय दिया। 
  • यह युद्ध 18 जून 1576 ईसवी में मेवाड़ के राणा महाराणा प्रताप और मुगल सेनापति मानसिंह के बीच लड़ा गया। 
  • इस युद्ध में महाराणा प्रताप मुगलों से अंतिम छण तक लड़ते रहे। 

प्लासी का युद्ध

  • प्लासी का युद्ध 23 जून 1757 ईसवी में बंगाल के नवाब सिराजद्दौला और अंग्रेजी सेनापति रॉबर्ट क्लाइव के बीच बंगाल के नदिया जिले के प्लासी नामक स्थान पर में लड़ा गया।
  • इस युद्ध में मोहनलाल और मीरमदान जैसे क्रांतिकारी अंग्रेजों से अंतिम समय तक लड़ते रहे और अपनी देशभक्ति का परिचय दिया। 
  • इस युद्ध में बंगाल के सेनापति मीरजाफर ने नवाब सिराजुद्दौला का साथ नहीं दिया और अंग्रेजों के हाथों बिक गया जिस कारण बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को हार का सामना करना पड़ा।
  • युद्ध के बाद बंगाल का नवाब मीरजाफर बना। 

वाण्डिवास का युद्ध

  • वाण्डिवास का युद्ध 1760 ईसवी में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच मद्रास और पांडिचेरी मध्य स्थित वाण्डिवास नामक स्थान पर लड़ा गया।
  • इस युद्ध में फ्रांसीसियों की हार हुई और पांडिचेरी पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया। 
  • इस युद्ध ने फ्रांसीसियों को भारत से बाहर कर दिया।
  • प्लासी के युद्ध के बाद अंग्रेज शक्तिशाली हो चुके थे अब भारत के व्यापार पर उनका ही एकमात्र अधिकार रह गया था। 

बक्सर का युद्ध

  • बक्सर का युद्ध 22 अक्टूबर, 1764 में बंगाल के नवाब मीरकासिम और अंग्रेजी सेनापति कैप्टन मुनरो के बीच बिहार के बक्सर नामक स्थान पर लड़ा गया।
  • मुगल शासक शहाआलम द्वितीय तथा अवध के नवाब शुजाउद्दोला बंगाल के नवाब मीरकासिम की संयुक्त सेना में शामिल थे।
  • इस युद्ध में मीरकासिम बुरी तरह पराजित हुआ। इस युद्ध के बाद भारत में अंग्रेजी राज्य के युग की शुरुआत हुई। 

भारत-पाकिस्तान युद्ध

  • भारत-पाकिस्तान का प्रथम युद्ध 1947 में लड़ा गया।
  • यह युद्ध कश्मीर के लिए लड़ा गया था। इस युद्ध में धोखे से जनजातीय कबायलियों ने भारत के कश्मीर पर हमला बोल दिया।
  • कश्मीर की रक्षा के लिए कश्मीर के राजा हरिसिंह ने भारत की शरण ली। 
  • भारतीय सेना ने राजा हरि सिंह का साथ दिया और भारतीय सेना ने सैन्य कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान को बुरी तरह पराजित किया। 
  • इसके साथ ही राजा हरि सिंह ने कश्मीर का विलय भारतीय संघ में कर दिया।

भारत-चीन का युद्ध

  • भारत-चीन का युद्ध 20 अक्टूबर 1962 को लड़ा गया था।
  • इस युद्ध में भारत की सेना बिना तैयारी से लड़ी जिससे उसे हार सामना करना पड़ा।
  • इस युद्ध का मुख्य कारण तिब्बत में चीन का अत्याचार माना जाता है।
  • 1959 में जब तिब्बत ने अपनी आजादी के लिए विद्रोह किया तो चीन की सेना ने तिब्बत के लोगों का कतलेआम करना शुरू कर दिया। 
  • उसी समय तिब्बत गुरु दलाई लामा ने भागकर भारत में शरण ली।
  • इस युद्ध का दूसरा मुख्य कारण माओत्से तुंग का कम्युनिस्ट पार्टी पर नियंत्रण स्थापित करना था।
  • जबकि चीन ने विवादित हिमालय सीमा को युद्ध का बहाना बनाकर लद्दाख में हमले करने शुरू कर दिए।
  • इससे दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हुआ। यह युद्ध करीब एक महीने चला।

भारत-पाक 1965 का युद्ध

  • यह युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच अप्रैल 1965 में लड़ा गया था।
  • यह युद्ध करीब 6 महीने तक चला। लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकल पाया। इस युद्ध में दोनों तरफ से हजारों सैनिक मारे गए।
  • इस युद्ध की शुरुआत पाक ने कश्मीर में हमले के साथ शुरू की। वह कश्मीर पर अधिकार करना चाहता था। 
  • अंत में संयुक्त राष्ट्र के तहत दोनों देशों के मध्य युद्ध विराम की घोषणा हुई और ताशकंद संधि के तहत सीमा पर शांति स्थापित हुई।

भारत-पाक 1971 का युद्ध

  • भारत और पाकिस्तान के बीच इस युद्ध की शुरुआत 3 दिसम्बर 1971 को हुई थी। 
  • यह युद्ध पूर्वी पाकिस्तान वर्तमान बांग्लादेश के लिए लड़ा गया। 
  • इस युद्ध में भारत की विजय से दुनिया के नक्शे पर एक नए राष्ट्र बांग्लादेश का जन्म हुआ। 
  • इस युद्ध में भारत की सेना ने अपनी शौर्यता का परिचय देते हुए पाकिस्तान को इतनी बुरी तरह से हराया कि यह हार उसे जिंदगी भर याद रहेगी।
  • 16 दिसम्बर 1971 को पाकिस्तान की सेना ने भारी संख्या में भारत की सेना के आगे घुटने टेक दिए। इस प्रकार इस युद्ध का समापन हुआ।

कारगिल युद्ध

  • कारगिल युद्ध भारत-पाकिस्तान के बीच 3 मई 1999 को कारगिल सेक्टर के पर्वतीय क्षेत्र में लड़ा गया था।
  • इस युद्ध में पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सीमा में घुसपैठ कर भारतीय हिस्से को कब्जाने की कोशिश की। कश्मीर के उग्रवादी संगठन भी पाक सेना में शामिल थे।
  • भारत ने ऑपरेशन विजय चलाया और 26 जुलाई 1999 को पाकिस्तान को पराजित किया।
  • यह युद्ध पर्वतीय क्षेत्र में लड़ा गया जिससे सेना को लड़ने में थोड़ी बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ा लेकिन सेना के शूरवीरों ने कारगिल पर झंडा फहरा कर भारत का सम्मान बढ़ाया।
  • इस युद्ध में शहीद हुए वीरों की याद में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को कारगिल दिवस मनाया जाता है।

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