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भारत की प्रमुख नदियां और उनके उद्गम स्थल

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हरिद्वार में गंगा का दृश्य

भारत की प्रमुख नदियां और उनके उद्गम स्थल

नमस्कार दोस्तों, मैं पंकज भारत हिंदी वेेेबसाइट ज्ञानीभारत.com पर आपका स्वागत करता हूँ। आज की पोस्ट में मैं आपको को भारत की प्रमुख नदियां और उनके उद्गम स्थल के बारे में जानकारी देने जा रहा हूं। आप इस पोस्ट को जरूर पढ़ें।

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भारत की विभिन्न परीक्षाओं में नदियों से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं। आईएएस की परीक्षा में कई बार नदियों से प्रश्न पूछे गए है। यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी। आप इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें। ताकि अन्य दोस्तों को भी इसकी जानकारी मिल जाए। अधिक जानकारी के लिए आप हमारी वेबसाइट www.ज्ञानीभारत.com विजिट करें।

भारत की प्रमुख नदियां और उनके उद्गम स्थल

सिंधु नदी

सिंधु नदी का उदगम तिब्बत में मानसरोवर झील के निकट कैलाश पर्वत श्रेणी में बोखर चू के पास हिमनद से होता है। इसका क्षेत्रफल 11 लाख 65 हजार वर्ग किलोमीटर है। इसकी कुल लंबाई 2880 किमी है। सिंधु नदी भारत में 1114 किमी का सफर तय करती है। अंत में अरब सागर में विलीन हो जाती है। सिंधु नदी को तिब्बत में सिंगी बखान के नाम से जाना जाता है। सिंधु नदी की प्रमुख सहायक नदियां चिनाब, झेलम, रावी, व्यास और सटलज हैं। इसकी अन्य सहायक नदियां द्रास, श्योक नुबरा, खुर्रम, तोची, गिलगित और जस्कर हैं। यह पूर्ववर्ती नदी है।

झेलम

झेलम नदी कश्मीर घाटी में स्थित वेरीनाग झरने से निकलती है। अंत में पाकिस्तान में झंग के निकट चिनाब नदी में विलीन हो जाती है। कश्मीर की राजधानी श्रीनगर झेलम नदी के तट पर स्थित है।

चिनाब

चिनाब नदी चंद्र और भागा नदियों के मिलन से बनती है। यह दो जल धाराएं हिमाचल प्रदेश में केलांग के निकट ताड़ी में आपस में मिलती है। जहां इसे चंद्रभागा के नाम से जाना जाता है। इसकी सहायक नदियां सोहल, थिरोट, भूट नाला, मारूसुंदर हैं।

सतलज नदी

सतलज नदी तिब्बत में स्थित मानसरोवर के निकट राकस ताल से निकलती है। यह पूर्ववर्ती नदी है। भाखड़ा नांगल बांध का निर्माण इसी पर किया गया है। तिब्बत में इसे लॉगचेन खबाब कहा जाता है। इसकी सहायक नदियां व्यास, नोगली, खड्ड और स्फीति है। 

रावी नदी

यह हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे से निकलती है। यह हिमाचल प्रदेश की चंबा घाटी के समांतर बहती है। अंत में पाकिस्तान में चिनाब नदी में विलीन हो जाती है। 

व्यास नदी

व्यास नदी का उदगम हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे के निकट व्यास कुंड से होता है। यह पंजाब में सतलज नदी से हरिके में विलीन हो जाती है।

गंगा नदी

गंगा नदी की उत्पत्ति उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गोमुख के निकट गंगोत्री हिमनद से हुई है। यहां पर इसे भागीरथी के नाम से जाना जाता है। जब भागीरथी देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलती है तो गंगा कहलाती है। गंगा नदी भारत में 2525 किमी का सफर तय करती है। अंत में यह बंगाल की खाड़ी में विलीन हो जाती है। यह भारत की सबसे प्रमुख और सबसे लंबी नदी है। यह एक पूर्ववर्ती नदी है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां यमुना, सोन, गोमती, घघर, गंडक, कोसी और महानन्दा है। यमुना गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी है। हरिद्वार, वाराणसी, प्रयाग, कानपुर और पटना गंगा के तट पर स्थित है।

यमुना नदी

यमुना नदी गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी है। इसका उदगम हिमालय में स्थित बन्दर पूछ श्रेणी ढाल पर यमुनोत्री हिमनद से हुआ है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां चंबल, सिंध, बेतवा, केन, हिंडन, रिंद, सेंगर और वरुणा है। प्रयाग में यमुना गंगा में विलीन हो जाती है। मथुरा, आगरा और दिल्ली यमुना के तट पर स्थित है। 

चंबल नदी

चंबल नदी का उदगम मध्य प्रदेश के महु (विंध्याचल पर्वत) से हुआ है। अंत में चंबल नदी यमुना नदी में विलीन हो जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां बनास, पार्वती और शिप्रा है। राजस्थान में गांधी सागर बांध इसी पर निर्मित किया गया है।

घघर नदी

इसकी उत्पत्ति हिमालय में मापचाचुंगों हिमनद से हुई है। अंत में यह बिहार के छपरा में गंगा में विलीन हो जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां शारदा, सेती, बेरी और तिल है। यह नदी अपना मार्ग परिवर्तित करने के लिए जानी जाती है। 

रामगंगा नदी

इसका उदगम हिमालय की गढ़वाल पहाड़ियों से हैं। अंत में यह कन्नौज के निकट गंगा में मिल जाती है।

गंडक नदी

इसका उदगम नेपाल हिमालय से हुआ है। यह काली गंडक और त्रिशूल गंगा धाराओं से मिलकर बनी है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां कालीगंडक और त्रिशूल गंगा है। यह भी अपना मार्ग परिवर्तित करने के लिए जानी जाती है। अंत में यह बिहार के सोनपुर जिले के निकट गंगा में विलीन हो जाती है। 

कोसी नदी

कोसी का उदगम माउंट एवरेस्ट से है। यह एक पूर्ववर्ती नदी है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां अरुण, सुन, कोसी और तमुर है। जब कोसी और अरुणा के मिलन से सप्तकोसी का निर्माण होता है।

शारदा नदी

इसका उदगम नेपाल हिमालय में स्थित कुमाऊं के पूर्वी भाग मिलाम हिमनद से होता है। जहां इसे पूर्वी गौरीगंगा के नाम से जाना जाता है। यह नेपाल-भारत की सीमा के समांतर बहती है। अंत में घघर नदी में विलीन हो जाती है। इसे गौरी गंगा, काली और सरयू आदि नामों से जाना जाता है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां धर्मा, लीसड और पूर्वी रामगंगा है।

महानन्दा

इसका उदगम स्थल पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग पहाड़ियों में है। यह पश्चिम बंगाल में गंगा के बाएं तट पर मिलने वाली अंतिम सहायक नदी है।

सोन नदी

यह मध्य प्रदेश के अमरकंटक के पठार से निकलती है। अंत में पटना के निकट सोनपुर में गंगा में विलीन हो जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां रिंहद और कुन्हड़ है। 

ब्रह्मपुत्र नदी

विश्व की बड़ी नदियों में से एक ब्रह्मपुत्र नदी का उदगम हिमालय के उत्तर में तिब्बत के मानसरोवर झील के निकट चेमयुंगडुंग हिमनद से हुआ है। इसकी कुल लंबाई 2900 किमी है। भारत में यह 920 किमी का सफर तय करती है। तिब्बत में इसे संगपो के नाम से जाना जाता है। तिब्बत से बहती हुई यह नदी भारत के अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है। असम घाटी में प्रवेश करने पर यह ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है। ब्रह्मपुत्र नदी को बांग्लादेश में जमुना के नाम से जाना जाता है। बांग्लादेश में पद्मा और जमुना के संयोग को मेघना कहा जाता है। अंत में पद्मा और जमुना की संयुक्त धारा मेघना बंगाल की खाड़ी में विलीन हो जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां सुबनसिरि, धनसिरि, दिबांग, लोहित, दिहांग, तिस्ता, मानस, कामेंग और कोपिली हैं। विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली ब्रह्मपुत्र नदी पर बना है।

गोदावरी नदी

इसका उदगम महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्रयंबककेशवर से हुआ है। यह प्रायद्वीप भारत की सबसे लंबी नदी है। इसे दक्षिणी गंगा भी कहा जाता है। इसकी लंबाई 1465 किमी है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां पेनगंगा, वेनगंगा, इंद्रावती, प्राणहिता, धरना, सबरी और मंजरा हैं। यह आंध्र प्रदेश के निकट राजमुंदरी में बंगाल की खाड़ी में विलीन हो जाती है। यह नदी डेल्टा का निर्माण करती है।

नर्मदा नदी

इसका उदगम मध्य प्रदेश में अमरकंटक के पठार से है। इसकी कुल लंबाई 1312 किमी है। यह सतपुड़ा पर्वत और विंध्य पर्वत के बीच भ्रंश घाटी से होकर बहती है। यह भडौच के निकट यह एश्चुरी या ज्वारनदमुख का निर्माण करती है। अंत में यह अरब सागर में विलीन हो जाती है। दुग्धधारा, धुआंधार और सहस्रधारा आदि जलप्रपात नर्मदा नदी पर स्थित है। सरदार सरोवर बांध इसी नदी पर बना है।

ताप्ती नदी

इसका उदगम मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मुल्ताई से माना जाता है। इसकी कुल लंबाई 724 किमी है। यह सतपुड़ा और अजंता श्रेणी की दरार घाटी से होकर बहती है। अंत में यह अरब सागर में विलीन हो जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां अरुणावती, पुरना, मोरना, गिरना पंजरा, बोरी हैं। यह एश्चुरी या ज्वारनदमुख का निर्माण करती है। गुजरात का सूरत शहर ताप्ती नदी के तट पर स्थित है।

कावेरी नदी

इसकी उत्पत्ति कर्नाटक के कुर्ग जिले में ब्रह्मगिरी पहाड़ी से हुई हैं। इसकी कुल लंबाई 800 किमी है। यह बारहमासी नदी है। तमिलनाडु के शहरों से बहती हुई अंत में बंगाल की खाड़ी में विलीन हो जाती है। तमिलनाडु का होगेनक्कल जल प्रपात और कर्नाटक के भारचुक्की और बालमुरी जल प्रपात कावेरी नदी बने हैं। तमिलनाडु का तिरूचिरापल्ली शहर भी कावेरी नदी के तट पर स्थित है। यह नदी शिवसमुद्रम जल प्रपात भी बनाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां हेमवती, अमरावती, कामिनी और भवानी आदि हैं।

कृष्णा नदी

इसका उदगम महाराष्ट्र के महाबलेश्वर से होता है। इसकी कुल लंबाई 1401 किमी है। यह डेल्टा का निर्माण करती है और अंत में बंगाल की खाड़ी में विलीन हो जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां घाटप्रभा, मालप्रभा, कोयना, तुंगभद्रा, पञ्चगंगा, दुधगंगा और मूसी हैं। 

महानदी

इसका उदगम छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में सिहावा पर्वत श्रेणी से हुआ है। इसकी कुल लंबाई 851 किमी है। यह कटक के निकट डेल्टा का निर्माण करती है और अंत में बंगाल की खाड़ी में विलीन हो जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां हसदेव, ओंग, तेल और सिओनथ हैं।

दामोदर नदी

इसकी उत्पत्ति झारखंड के छोटानागपुर के पठार से हुई है। अंत में यह पश्चिम बंगाल में हुगली नदी में विलीन हो जाती है। इसकी कुल लंबाई 592 किमी है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां कोनार, बराकर और जमुनिया हैं। दामोदर घाटी परियोजना दामोदर नदी पर स्थित है।

साबरमती नदी

इसका उदगम राजस्थान के उदयपुर जिले की अरावली पर्वत से है। इसकी कुल लंबाई 382 किमी है। अंत में यह अरब सागर में विलीन हो जाती है। गुजरात की राजधानी गांधीनगर और अहमदाबाद  साबरमती नदी के तट पर स्थित है। गुजरात में स्थित धोराई बांध भी इसी पर बना है।

स्वर्णरेखा नदी

स्वर्णरेखा नदी का उद्गम रांची जिले के नगरी गांव से हुआ है। अंत में बंगाल की खाड़ी में विलीन हो जाती है। इसकी कुल लंबाई 474 किमी है। इस नदी के रेत के कणों में सोने की मात्रा पाई जाती है इसलिए इसका नाम स्वर्णरेखा नदी पड़ा।

लूनी नदी

लूनी नदी का उद्गम अरावली की पहाड़ियों से हुआ है। इससे पहले यह पुष्कर में दो धाराओं में बंट जाती है। आगे चलकर गोविंदगढ़ के निकट आपस में मिल जाती है और लूनी नदी के नाम से जानी जाती है। अंत में यह गुजरात में स्थित कच्छ के रण में विलुप्त जाती है। इसकी कुल लंबाई 495 किमी है। यह एक मरुस्थलीय नदी है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां जवाई, बाड़ी और मिठड़ी है। राजस्थान में स्थित गोविंद सागर बांध इसी पर स्थित है। 

तुंगभद्रा नदी

इस नदी की उत्पत्ति पश्चिम घाट के गंगामूला नामक स्थान से हुई है। जहां पर तुंग और भद्रे नदी के मिलन से इसका जन्म होता है। इसकी कुल लंबाई 531 किमी है। विश्व प्रसिद्ध हंपी शहर तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित है। अंत में यह कृष्णा नदी में विलीन हो जाती है।

शरावती नदी

इस नदी का उद्गम कर्नाटक के शिमोगा जिले से हुआ है। इसकी कुल लंबाई 160 किमी है। अंत में यह अरब सागर में विलीन हो जाती है। भारत में प्रसिद्ध जोग जल प्रपात इसी पर बना है।

पेरियार नदी

यह नदी केरल के पश्चिम घाट से निकलकर पश्चिम दिशा में प्रवाहित होती है। इसकी कुल लंबाई 244 किमी है। अंत में यह अरब सागर में विलीन हो जाती है। केरल में स्थित ईडुक्की बांध इसी नदी पर बना है। 

क्षिप्रा नदी

इस नदी का उद्गम मध्य प्रदेश की महुआ छावनी के निकट जानापाव की पहाड़ियों से हुआ है। अंत में यह चंबल नदी में विलीन हो जाती है। इस नदी की कुल लंबाई 196 किमी है। उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध कुंभ मेला इसी नदी के तट पर लगता है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मन्दिर भी यही है।

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COMMENTS

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    Hello Nice

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