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मुगल शासक बाबर का इतिहास

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बाबर (1483 – 1530 ई.)

मुगल वंश की स्थापना बाबर ने 1526 ईसवी में की थी। बाबर को ही भारत में मुगल साम्राज्य के विस्तार का श्रेय जाता है। बाबर का जन्म 14 फरवरी, 1483 ईसवी को फरगना में हुआ था। इनका पूरा नाम जहिरूददीन मुहम्मद बाबर था। बाबर पिता की ओर से तैमूर का पांचवां वंशज और माता की ओर से चंगेज खान का 14वां वंशज था। इनके पिता उमर सेख मिर्जा फरगना के शासक थे। पिता की मृत्यु के बाद बाबर 8 जून, 1494 में फरगना की गद्दी पर बैठा। और 1504 ईसवी में काबुल विजय के साथ साम्राज्य का विस्तार किया। बाबर ने साम्राज्य के विस्तार और धन की लालसा के कारण भारत की ओर रूख किया। बाबर को भारत पर आक्रमण करने का निमंत्रण पंजाब के शासक दौलत खां लोदी और मेवाड़ के शासक राणा सांगा ने दिया था। बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध 21 अप्रैल, 1526 में दिल्ली के शासक इब्राहिम लोदी को बुरी तरह हराया। बाबर की यह जीत दूरगामी साबित हुई। इसी जीत के साथ भारत में मुगल वंश की स्थापना हुई। बाबर ने भारत पर पांच बाबर आक्रमण करने की बात स्वीकार की है।

बाबर के कुछ प्रमुख आक्रमण

  • पानीपत का प्रथम युद्ध 21 अप्रैल, 1526 को बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच, बाबर विजय
  • खानवा का युद्ध 17 मार्च, 1527 को बाबर और राणा सांगा के बीच, बाबर विजय
  • चंदेरी का युद्ध 29 मार्च, 1528 को बाबर और मेदनी राय के बीच, बाबर विजय
  • घघर का युद्ध 6 मई, 1529 को अफगानों और बाबर के बीच, बाबर विजय
पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने पहली बार तोपखाने और तुगलम्मा युद्ध नीति का प्रयोग किया था। इस युद्ध में बाबर के दो निशानेबाज उस्ताद अली और मुस्तफा ने भाग लिया था। पानीपत का प्रथम युद्ध जितने के बाद बाबर ने काबुल के प्रत्येक निवासी को चांदी का एक एक सिक्का दिया था, इस उदारता के कारण बाबर को कलंदर कहा गया।
बाबर को मुबईयान पद शैली का जन्मदाता माना जाता है। बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा लिखी। यह किताब बाबर ने तुर्की भाषा में लिखी थी। 1590 ईसवी में अब्दुर रहीम खानेखाना ने इसका फारसी में अनुवाद किया। 27 सितम्बर, 1530 को बाबर की आगरा में मृत्यु हो गई। इन्हें पहले आगरा के आरामबाग, बाद में काबुल में दफनाया गया। बाबर की मृत्यु के बाद हुमायूं 1530 ईसवी को मुगल वंश का शासक बना।

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