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प्रमुख राजवंश और उनकी राजधानी

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वीर मराठा छत्रपति शिवाजी महाराज

प्रमुख राजवंश और उनकी राजधानी

प्रमुख राजवंश और उनकी राजधानी : प्राचीन काल से ही भारत युद्धों की भूमि रही है। यहां ना जाने कितने राजवंश आए और मिट गए। सबका अपना अपना उद्देश्य था। कुछ धन की लालसा के लिए लड़ते थे तो कुछ साम्राज्य विस्तार के लिए तो कुछ मातृभूमि की रक्षा के लिए। कुछ ऐसे राजवंश थे जिन्होंने लंबे समय तक इस धरती पर राज किया। मौर्य वंश के सम्राट अशोक और वर्धन वंश के सम्राट हर्षवर्धन अपनी धार्मिक नीति के लिए बड़े प्रसिद्ध थे। जबकि खिलजी वंश के शासक अलाउद्दीन खिलजी और मुगल वंश के शासक औेरंगजेब जीवन के अंत समय तक भी आम जनता के रक्तपात में लिप्त रहे।

आज मैं आपको इस पोस्ट में भारत के प्रमुख राजवंश जैसे हर्यक वंश, मौर्य वंश, गुप्त वंश, मुगल वंश और मराठा वंश और उनकी राजधानी के बारे में जानकारी देने जा रहा हूं। यह पोस्ट छात्रों की आने वाली परीक्षाओं जैसे NTPC, IAS, PCS, SSC, Delhi SI के लिए बहुत ही उपयोगी होगी। https://youtu.be/Iaw63s2GnJA

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प्रमुख राजवंश और उनकी राजधानी
हर्यक वंश

इस वंश की स्थापना बिम्बिसार ने 544 ईसा पूर्व में की थी। इस वंश का केंद्र बिंदु मगध राज्य था। इसकी राजधानी गिरिब्रज या राजगृह थी। बाद में उदायिन राजधानी को पाटलिपुत्र ले गया।

शिशुनाग वंश 

इस वंश की स्थापना शिशुनाग ने 412 ईसा पूर्व में की थी। इसकी राजधानी वैशाली थी। 

नन्द वंश

नन्द वंश की स्थापना महापद्मनन्द ने पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व में की थी। ये मगध पर शासन करते थे। इसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी।

मौर्य वंश

मौर्य वंश की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने गुरु चाणक्य की सहायता से 322 ईसा पूर्व में की थी। इसने अपने शत्रु घनानंद को हराकर इस वंश की स्थापना की। इसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी। 

शुंग वंश

शुंग की स्थापना पुष्यमित्र शुंग ने 185 ईसा पूर्व में अंतिम मौर्य सम्राट वृहद्रथ की हत्या करके की थी। इस वंश की राजधानी विदिशा थी। 

कण्व वंश

इस वंश की स्थापना वासुदेव ने 75 ईसा पूर्व में शुंग वंश के अंतिम शासक देवभूति की हत्या करके की थी। कण्व वंश की राजधानी पाटलिपुत्र थी।

सातवाहन वंश

सातवाहन वंश की स्थापना शिमुक ने की थी। इसने कण्व वंश के अंतिम सम्राट सुशर्मन की हत्या करके इस वंश की स्थापना की। इसकी राजधानी प्रतिष्ठान थी।

गुप्त वंश

गुप्त वंश वंश की स्थापना 275 ईसवी में श्री गुप्त ने की थी। यह गुप्त वंश का प्रथम सम्राट था। गुप्त वंश का वास्तविक संस्थापक चन्द्रगुप्त प्रथम को माना जाता है। जिसने 319 ईसवी में सत्ता की बागडोर संभाली। इसने संपूर्ण उत्तरी भारत पर राज किया। इसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी।

वर्धन वंश

वर्धन वंश की स्थापना पुष्यभूति ने छठी शताब्दी ईसवी में थानेश्वर वर्तमान हरियाणा में की। इस वंश का प्रतापी और अंतिम हिन्दू सम्राट हर्षवर्धन था। इसने 606 से 647 ईसवी तक शासन किया। इसने राजधानी को थानेश्वर से कन्नौज स्थानांतरित किया।

गुर्जर प्रतिहार वंश

गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना नागभट्ट प्रथम ने 725 ईसवी में थी। इनकी राजधानी मालवा थी। इस वंश के राजा 1018 ईसवी तक शासन करते रहे।

पाल वंश

इस वंश का संस्थापक गोपाल को माना जाता है। इसने इस वंश की स्थापना 750 ईसवी में की। इसके शासन का केंद्र बिंदु बंगाल था। पाल वंश की राजधानी मुंगेर थी।

सेन वंश

सेन वंश की स्थापना सामंत सेन ने 1070 ईसवी में की थी। इस वंश की राजधानी नदिया थी।

राष्ट्रकूट वंश

राष्ट्रकूट वंश की स्थापना दंतिदुर्ग ने 736 ईसवी में की थी। इस वंश की प्रारंभिक राजधानी नासिक थी। बाद के शासक राजधानी को मान्यखेत ले गए।

कुषाण वंश

कुषाण वंश का संस्थापक कुजुल कडफिसस था। इसने इस वंश की स्थापना 30 ईसवी में की थी। इस वंश का महान सम्राट कनिष्क प्रथम था। यह 78 ईसवी में राजा बना। इसने ही 78 ईसवी में शक संवत की स्थापना की। इस वंश की राजधानी पेशावर थी। 

चोल वंश

चोल वंश की स्थापना विजयालय ने 850 ईसवी में की थी। इसकी राजधानी तंजावूर थी।

चालुक्य वंश

इस वंश की स्थापना पुलकेशिन प्रथम ने 543 ईसवी में की थी। इस वंश की राजधानी बादामी थी।

पल्लव वंश

पल्लव वंश का वास्तविक संस्थापक सिंह विष्णु था। इसने 575 ईसवी में इस वंश की स्थापना की। पल्लव वंश की राजधानी कांचीपुरम थी। 

गुलाम वंश

गुलाम वंश मध्यकालीन भारत का मुस्लिम वंश था।इस वंश की स्थापना मोहम्मद गौरी के गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी। इसने 1206 ईसवी में इस वंश की नींव रखी। इसकी राजधानी लाहौर थी। बाद में गुलाम वंश का शासक इल्तुतमिश राजधानी को दिल्ली ले गया। 

खिलजी वंश

इस वंश की स्थापना जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने 1290 ईसवी में की थी। इसकी राजधानी दिल्ली थी।

तुगलक वंश

इस वंश की स्थापना गयासुद्दीन तुगलक ने 1320 ईसवी में की। इसकी राजधानी दिल्ली थी।

सैय्यद वंश

सैय्यद वंश की स्थापना खिज्र खां ने 1414 ईसवी में की थी। इस वंश की राजधानी दिल्ली थी।

लोदी वंश

सैय्यद वंश के अंतिम शासक अलाउद्दीन आलमशाह के पद त्यागने के बाद बहलोल लोदी ने इस वंश की स्थापना 1451 ईसवी में की थी। इसकी राजधानी दिल्ली थी।

बहमनी वंश

बहमनी वंश की स्थापना अलाउद्दीन बहमन शाह ने की थी। इस वंश की स्थापना 1347 ईसवी में की गई थी। इसकी राजधानी गुलबर्गा थी।

संगम वंश

संगम वंश की स्थापना हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने की थी। इस वंश की नींव 1336 ईसवी में रखी गई। इस वंश का नाम हरिहर-बुक्का ने अपने पिता के नाम पर रखा। इस वंश की राजधानी तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित विजयनगर थी।

सालुव वंश

इस वंश की स्थापना नरसिंह सालुव ने 1485 ईसवी में की थी। इसकी राजधानी विजयनगर थी।

तुलुव वंश

तुलुव वंश की स्थापना वीर नरसिंह ने 1505 ईसवी में की थी। इसकी राजधानी विजयनगर थी।

आरवीडू वंश

आरविडू वंश की स्थापना तिरुमल ने 1570 ईसवी में की थी। इस वंश की राजधानी पेनुगोंडा थी। 
मुगल वंश

मुगल वंश

मुगल वंश की स्थापना बाबर ने 1526 ईसवी में की थी। मुगल वंश की राजधानी आगरा थी। 

सूर वंश

सूर वंश की स्थापना 1540 ईसवी में शेरशाह सूरी ने की थी। सूर वंश की राजधानी दिल्ली थी। 

मराठा वंश

मराठा वंश की स्थापना छत्रपति शिवाजी ने 1674 ईसवी में की थी। इस वंश की राजधानी रायगढ़ थी। 

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