नेपोलियन बोनापार्ट के अनमोल विचार - ज्ञानीभारत.com

नेपोलियन बोनापार्ट के अनमोल विचार

Napoleon Bonaparte Quotes In Hindi

नेपोलियन बोनापार्ट

नेपोलियन बोनापार्ट के अनमोल विचार : नेपोलियन बोनापार्ट का जन्म 15 अगस्त 1769 ईसवी को फ्रांस के अजैक्यिो शहर में हुआ था। नेपोलियन के चार भाई और तीन बहनें थीं। यह एक रईस परिवार में पैदा हुए थे। नेपोलियन की प्रारंभिक शिक्षा अच्छे स्कूल में हुई थी। प्रारम्भिक शिक्षा पूरी करने के बाद नेपोलियन ने सैन्य अकादमी में दाखिला लिया। जहाँ उसने सैन्य शिक्षा ग्रहण की। सैन्य शिक्षा पूरी करने के बाद नेपोलियन आगे की शिक्षा ग्रहण करने के लिए पेरिस चला गया। यहां नेपोलियन ने तोपखाना से संबंधित शिक्षा ग्रहण की। नेपोलियन की कुशलता को देखकर फ्रांस के राजकीय तोपखाना में उन्हें सब लेफ्टिनेंट बना दिया गया। यह नेपोलियन की पहली नौकरी थी। नेपोलियन को जो वेतन मिलता था उससे वह अपने भाई बहनों का पालन पोषण करता था। धीरे धीरे फ्रांस के प्रभावशाली नेताओं से उसका परिचय बढ़ा। कुछ ही दिनों में नेपोलियन ने फ्रांस के प्रभावशाली लोगों पर ऐसी छाप छोड़ी की उन्हें आंतरिक सेना का सेनापति बना दिया गया। इसी दौरान 9 मार्च, 1796 को जोसेफाइन से नेपोलियन का विवाह हो गया। उनकी पहली पत्नी जोसेफाइन निसंतान थी। उनका दूसरा विवाह आस्ट्रिया के सम्राट की पुत्री मेरी लुईस से हुआ। जिससे उन्हें संतान का सुख मिला।

नेपोलियन बोनापार्ट के अनमोल विचार

नेपोलियन युद्ध कौशल में निपुण था। उसने अपने युद्ध कौशल से विदेशी शत्रुओं को पराजित किया। और फ्रांस की रक्षा की। इससे फ्रांस में उसके प्रति सम्मान और बढ़ गया। युद्ध कौशल और साहस को देखते हुए उन्हें फ्रेंच आर्मी ऑफ इटली का सेनापति बना दिया गया। अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए सार्डिनिया पर चढ़ाई की। नेपोलियन की कूटनीतिक चाल से सार्डिनिया आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर हुआ। नेपोलियन ने सार्डिनिया के जीते हुए राज्यों को फ्रांस में मिला लिया। नेपोलियन का अगला टारगेट इंग्लैंड था। उस समय इंग्लैंड भी पॉवरफुल था। उसके पास भी कुशल सैनिक थे। अंततः नेपोलियन इंग्लैंड की ओर बढ़ा। दुर्भाग्यवश इंग्लिश चैनल की बाधा के कारण नेपोलियन अपने टारगेट को पूरा नहीं कर पाया जिससे नेपोलियन को पराजय का सामना करना पड़ा। नेपोलियन ने हार नहीं मानी क्योंकि वह एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति था। और पूरी दुनिया पर राज करना चाहता था। नेपोलियन इस बार मिस्र को जितना चाहता था। उसने इस युद्ध में मिस्र की ईंट से ईंट बजा दी। मिस्र को जितने के बाद नेपोलियन इंग्लैंड से अपनी हार का बदला लेना चाहता था। उसने पूर्वी एशिया में ब्रिटिश उपनिवेशों को अपने अधीन करने का निश्चय किया। इस जीत को हासिल करने के लिए नेपोलियन 1798 ईसवी में ब्रिटिश उपनिवेशों की ओर बढ़ा। उसकी सेना में 35 हजार प्रशिक्षित सैनिक थे। अपनी सैनिक शक्ति के बल पर उसने माल्टा, पिरामिड, सिंकदरिया और नील नदी घाटी को अपने अपने कब्जे में ले लिया। अपनी इस जीत की खुशी से लालायित नेपोलियन भारत की ओर बढ़ा उस समय भारत ब्रिटेन का उपनिवेश था। परंतु ब्रिटिश सैनिक शक्ति के आगे उसकी एक न चली। अत: नेपोलियन को हार का सामना करना पड़ा। कुछ राज्यों को विजित करने के बाद वह वापस फ्रांस लोट आया।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

फ्रांस में जनता के बीच वह लोकप्रिय था। उसकी लोकप्रियता का कारण उसकी सैनिक कुशलता थी। उसने फ्रांस को दुनिया में एक नई पहचान दी। फ्रांस में उसने एक नई कोंसुलेट सरकार की स्थापना की। और 15 दिसम्बर 1799 को फ्रांस का शासक बन बैठा। शासक बनने के 15 दिनों बाद ही नेपोलियन ने एक नया संविधान लागू किया। उनके नाम पर सम्राट की मुहर तब लगी जब 1804 ईसवी में सीनेट ने एक प्रस्ताव में उसे अपना सम्राट घोषित किया।

नेपोलियन बोनापार्ट के अनमोल विचार

सम्राट बनते ही उसने फ्रांस की जनता के हित में अनेक कार्य किए। नेपोलियन ने शिक्षा, सैन्य और प्रशासनिक स्तर पर अमूल चूल परिवर्तन किए। नेपोलियन ने पादरियों के स्वामित्व पर रोक लगाई। क्योंकि पादरी चर्च और अंध विश्वास की आड़ में जनता को मूर्ख बना रहे थे। इससे पादरियों ने अपने पास अपार धन सम्पत्ति इकठ्ठा कर ली थी। यह शाही और अय्याशी का जीवन व्यतीत कर रहे थे। दूसरी तरफ आम जनता दुखी थी। आम जनता को पीड़ा से मुक्ति दिलाने के लिए नेपोलियन ने चर्च के विशेषधिकार को समाप्त किया और चर्च की संपति को जब्त करने के लिए फ्रांस में एक नया संविधान लागू किया। 

व्यक्ति की अति महत्वाकांक्षा उसके पतन का कारण बनती है। नेपोलियन के साथ भी यही हुआ नेपोलियन की अति महत्वाकांक्षा और उसके ज़िद्दीपन ने उसका सर्वनाश कर दिया। वह पूरी दुनिया पर राज तो करना चाहता था। लेकिन वह यह नहीं जानता था कि दूसरा देश भी उससे ज्यादा ताकतवर हो सकता है। कई देशों पर विजय प्राप्त करने के बाद वह संतुष्ट नहीं था। उसे और जीत की लालसा थी। दूसरी तरफ यूरोप के कई देश नेपोलियन को फ्रांस की सत्ता से बेदखल करना चाहते थे। अतः वाटरलू का युद्ध नेपोलियन का अंतिम युद्ध था। यह युद्ध 1815 को वाटरलू नामक स्थान पर लड़ा गया। इस युद्ध में फ्रांस और मित्र राष्ट्र आमने सामने थे। मित्र राष्ट्रों में इंग्लैंड, पर्शिया, रूस, हंगरी थे। 18 जून, 1815 को मित्र राष्ट्रों ने वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन को अंतिम रूप से पराजित किया। और उसकी सत्ता का अंत किया। इस युद्ध में नेपोलियन के आत्मसमर्पण करने के बाद उसे बन्दी बनाकर सेंट हेलना द्वीप में भेज दिया गया।

सेंटहेलना द्वीप में 1821 ईसवी में 52 वर्ष की आयु में नेपोलियन की मृत्यु हो गई। इस प्रकार विश्व में एक नई ख्याति प्राप्त कर नेपोलियन के जीवन का अंत हुआ। इतिहासकार मानते हैं कि उनकी मौत का कारण पेट का कैंसर था। सन् 2001 में फ्रांस की एक टीम जो नेपोलियन के ऊपर रिसर्च कर रहीथी उसने नेपोलियन के बाल का एक सैंपल लिया और प्रयोगशाला में रिसर्च किया। जिसमें आर्सेनिक नामक जहर पाया गया। इससे इस बात का अंदाजा लगाया गया कि संभवत सेंट हैलेना के तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर ने फ्रांस के काउंट के साथ मिलकर नेपोलियन की हत्या की साजिश रची। उनकी मौत को साजिश के तहत की गई एक हत्या भी माना जाता है।

नेपोलियन बोनापार्ट के अनमोल विचार

“संविधान छोटा और अस्पष्ट होना चाहिए।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“कोई व्यक्ति अपने अधिकारों से ज्यादा अपने हितों के लिए लड़ेगा।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“एक सैनिक एक रंगीन रिबन के लिए दिलो जान से लड़ेगा।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“मौत कुछ भी नहीं है , परंतु हार कर और लज्जित होकर जीना रोजाना मरने के बराबर है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“एक तस्वीर हज़ार शब्दों के बराबर होती है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“मैं कभी लोमड़ी बनता हूँ तो कभी शेर। शासन का पूरा रहस्य यह जानने में है कि कब क्या बनना है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“एक सेना अपने पेट के बल पर आगे बढ़ती है।”

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“गरीब रहने का एक पक्का तरीका है कि आप ईमानदार रहे।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“मेरी डिक्शनरी में असंभव शब्द नहीं है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“इंग्लैंड बनियों का देश है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“जीत उसे मिलती है जो सबसे अधिक दृढ़ रहता है।”

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“एक सच्चा इंसान किसी से नफरत नहीं करता।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“अवसर के बिना योग्यता कुछ भी नहीं है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“उनमें से जो अत्याचार नहीं पसंद करते, कई ऐसे होते हैं जो अत्याचारी होते हैं।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“अगली दुनिया में हम सेनापतियों से ज्यादा डॉक्टरों को लोगों की जिंदगियों के लिए जवाब देना होगा।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“एक राजगद्दी महज मखमल से ढंकी एक बेंच है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“मैंने अपने सभी सेनापति कीचड़ से बनाये हैं।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“इतिहास सदैव विजेताओं द्वारा लिखा गया हैं।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“असंभव शब्द सिर्फ बेवकूफों की डिक्शनरी में पाया जाता है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“अनजाने रास्तो पर वीर ही आगे बड़ा करते हैं कायर तो परिचित राह पर ही तलवार चमकाते है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“राजनीति में कभी पीछे ना हटें , कभी अपने शब्द वापस ना ले और कभी अपनी गलती ना मानें।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“कल्पना ही दुनिया पर शासन करती है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“युद्ध असभ्यों का व्यापार है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“केवल इच्छा मात्र से एक आदमी नास्तिक नहीं बन जाता।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“मेरे देश को जितनी मेरी आवश्यकता है, उससे अधिक मुझे मेरे देश की।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“राजनीति में मूर्खता एक बाधा नहीं है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“यदि आपको लगता है की चीज़े सही तरीके से हों तो आप उसे खुद कीजिये।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“आमतौर पर सैनिक लड़ाइयाँ जीतते हैं; सेनापति उसका श्रेय ले जाते हैं।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“सच अकेले ही घाव कर देता है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“शेर द्वारा संचालित भेड़ों की सेना, भेड़ द्वारा संचालित शेरों की सेना से हमेशा जीतेगी।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“पिरामिडों की इन ऊंचाइयों से चालीस सदियाँ हमें देख रही है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“ये कारण है, ना कि मौत,जो किसी को शहीद बनाता है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“सम्पन्नता धन के कब्जे मैं नहीं उसके उपयोग में है।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“हजार खंजरों की तुलना में चार विरोधी अखबारों से अधिक डरना चाहिए।”

नेपोलियन बोनापार्ट

“मरने की तुलना में कष्ट सहने के लिए ज्यादा हिम्मत की आवश्यकता होती है।”

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